भागो भागो शोर है आया- भारत की बेटी अब नहीं जलेगी


भारत की बेटी अब नहीं जलेगी

भागो भागो शोर है आया
धुएं का उड़ता गुबार लाया
क्या किसी ने पटाखा जलाया
या पराली का जहर है छाया

भागो भागो शोर है आया
अरे नहीं फिर कोई है जलाया 
किसी की बेटी का जला जिस्म पाया
मानवता को करता शर्मसार आया

भागो भागो शोर है आया
ट्विटर चलाया फ़ेसबुक चलाया
सारे कैमरों ने आतंक मचाया
व्हाट्सअप पर भी खूब है चिपकाया

भागो भागो शोर है आया
इसको जलाया उसको भी जलाया
बेटियों पर काला साया है छाया
हमने भी जोश में मोमबत्ती को जलाया

भागो भागो शोर आया
पर कब तलक सिसकेगी ट्विंकल 
जाने कितनी प्रियंका और निर्भया
आसिफा पर तो आसमान था ठाया

भागो भागो शोर है आया
कोई नहीं जो समझ ये पाया
दर्द का भरता उबाल है काया
जिस्म नौंच कर जब उसने जलाया

भागो भागो शोर है आया
सती नहीं अब बनना है ज्वाला
बहुत पी लिया जहर का प्याला
काली सा भद्र रूप है धराया

देखो देखो शोर है आया

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हम राम के वंशज - हिन्दू भला है तभी तो छला है

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राम इस देश की आत्मा है   

यूँ तो यह देश आर्यो का देश कहलाया जाता है। हम इस देश में कब,कैसे और कहाँ से आए इसके बारे में भी इतिहास कारो के अपने अपने मत और विश्वाश है। लेकिन इसमें किसी को कोई मदभेद नहीं की यह देश हज़ारो सभ्यता देख चुका। हमारे वेदो-पुराणों  में इसके साक्ष्य भी मिलते है। 

लेकिन ये बहुत विचित्र ही है एक तरफ जहां हम राम के नाम पर दशहरा और दिवाली मनाते है वही कुछ लोगो को राम के होने के सबूत चाहिए। बहुत बचकाना है ,ये सब! कि जिसके पूर्वज के बारे में पुराणों में लिखा गया।  जिसके नाम से आपका दिन शुरू और खत्म होता है, जिसको हमारे सविधान में पहले पृष्ट पर अंकित किया गया, वो है भी या नहीं इसका प्रमाण हमारा न्याय तंत्र मांगता है। 

वो भी किस लिए जो बाहर से आकर इस देश पर राज करता है  हमारे धार्मिक स्थलों को तोड़ता है।  वो भी उस स्थल को जो हिन्दुओ का प्रतिक है ताकि हिन्दुओं का अस्तित्व धीरे -धीरे समाप्त हो जाए और लोगो के पास ऐसा कोई साक्ष ना बचे। जिससे ये साबित हो सके की ये कि यह एक  हिन्दू राष्ट्र था। तभी आज अदालत में जब हम अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे है तो बार बार एक ही सवाल उठाया जाता है कि है कोई सबूत की राम यहाँ पैदा हुए।

कौन थे वो लोग जो भारत में आये? क्या था उनका मकसद सिर्फ चोरी या मंदिर तोडना नहीं। यही है असली कहानी।  इनका मकसद सिर्फ चोरी करना नहीं था मंदिर तोडना नहीं था बल्कि हिंदू सभ्तया को नष्ट करना था। इसके लिए बाहर से आये लोगो ने जो केवल आये तो थे लूट करने लेकिन वो यही बस गए बल्कि उनके पास इतनी ताकत भी आ गई की उन्होंने इस देश पर सालो तक राज किया। कैसे? 

यहाँ आपको समझने की जरुरत है।  कि ये जो लोग बाहर से आये इनके साथ इनके बीवी बच्चे नहीं थे मतलब साफ़ है इन्होने यही से दरिंदगी दिखानी सुरु की।  और हमारी माँ बहनो का बलात्कार इन्ही के आने के बाद शुरू हुआ। इन्होने औरतो पर अत्याचार किये और उनसे जो बच्चे पैदा हुए वो आज अपना रंग दिखा रहे है। लेकिन ये बात हमें समझनी पड़ेगी कि इनको पन्हा देने वाले वो लालची हिन्दू ही रहे होंगे जो आज बाबर की पैरवी करते है।

हिन्दु भला है तभी तो छला है -

क्यों है हिन्दू इतना भला! क्या आपने जानने की कोशिश की है? शायद नहीं! तो चलो हम आपको बताते है कि क्यूँ हिन्दू कट्टर नहीं हो सकता है। 

पिछले कुछ सालों में इस देश में इस  शब्द ने हमारे कानो पर राज किया वो है असहिष्णुनता! क्यों ? वो इसीलिए कि ये शब्द हमारे धर्म में है ही नहीं बल्कि ये शब्द जाहिलता की निशानी है और ये शब्द एक ऐसे धर्म को चिन्हित करता है जो शायद मानवता के खिलाफ है या कट्टरता की निशानी है। इसीलिए जानबूछकर इसको हिन्दुओं के खिलाफ हथियार बना कर पेश किया जाता है। क्योंकि सच्चाई यही है कि हिन्दु जैसा सहिष्णु जीव इस धरती पर दूसरा कोई नहीं है। 

सहिष्णुता का अर्थ है किसी पर भी आगे रहकर आक्रमण नहीं करना और सहनशील बनना, लेकिन यह अधुरा अर्थ हो सकता है। सहिष्णुता का गलत अर्थ लेने के कारण ही पृथ्‍वीराज चौहान ने हर बार शुत्र को छोड़ दिया लेकिन शत्रु ने इस सहिष्णुता का लाभ उठाकर पुन: आक्रमण कर सबकुछ तहस नहस कर दिया।

सबसे जरूरी है कि हम अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति सहिष्णु बनें। इसमें कोई शक नहीं कि सहिष्णुता हमारी दिनचर्या का एक मुख्य गुण है। इस गुण को अपनाने से हम सदैव प्रसन्नचित तथा प्रफुल्लित रहते हैं इसलिए हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों को सहिष्णुता के महत्व को बताना चाहिए तथा हमें भी अपने बड़ों से भी ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। लेकिन इसकी यह शर्त है कि कोई यदि हमारी सहिष्णुता का सम्मान करता है तो ही सहिष्णु रहा जाए। 

सहिष्णुता का अर्थ है सहन करना और उदारता का अर्थ है खुले दिमाग और विशाल हृदय वाला। जो स्वभाव से नम्र और सुशील हो और पक्षपात या संकीर्णता का विचार छोड़कर सबके साथ खुले दिल से आत्मीयता का व्यवहार करता हो, उसे 'उदार' कहा जाता है। दूसरों के विचारों, तर्कों, भावनाओं और दुखों को समझना ही उदारता है। अनुदारता पशुवत होती है। अपनी रुचि, मान्यता, इच्छा, विचार, धर्म को दूसरों पर लादना, अपने ही गज से सबको नापना, अपने ही स्वार्थ को साधते रहना ही अनुदारता है।

 दुनिया के दूसरे धर्मों में यह प्रवृत्ति स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। सहिष्णुता और उदारता हिन्दू के खून में है तभी तो पिछले सैकड़ों वर्षों से उनका खून बहाया जाता रहा है। तभी तो हिन्दुओं का धर्मांतरण किया जाता रहा है। हिन्दू धर्म में उदारता और सहिष्णुता का कारण यह है कि इस धर्म में परहित को पुण्य माना गया है।

 न्याय और मानवता (इंसाफ और इंसानियत) को धर्म से भी ऊंचा माना गया है। न्याय और मानवता की रक्षा के लिए सबकुछ दांव पर लगा देने के लिए हिन्दुओं को प्रेरित किया जाता रहा है। यही कारण है कि इस धर्म में प्राचीनकाल से ही कभी कट्टरता नहीं रही और इस उदारता, सह-अस्तित्व और सहिष्णुता की भावना के चलते ही हिन्दुओं ने कभी भी किसी दूसरे धर्म या देश पर किसी भी प्रकार का कोई आक्रमण नहीं किया। इसका परिणाम यह रहा कि आक्रांताओं ने समय-समय पर गुलाम बनाकर हिन्दुओं को धर्म, जाति और पंथों में बांट दिया, उनका कत्लेआम किया गया और उन्हें उनकी ही भूमि से बेदखल कर दिया गया।

यही कारण है की आज हम अपने आराध्य का एक राम मंदिर बनवाने के लिए भी कानूनी लड़ाई लड़ रहे है। हमने यहां भी पूरी मानवता को सन्देश दिया कि हिन्दू जैसा सहिष्णु विश्व में दूसरा कोई धर्म नहीं है।  और शायद यही गीता का भी सार है की लड़ो जरूर, लेकिन मानवता को बचाने के लिए लड़ो जरूर , लेकिन उनके खिलाफ जो उसको नष्ट करने वालों है।  

इसी लिए हम कहते है, गर्व से कहते है कि हाँ मैं एक हिन्दू हूँ मेरी आस्था बचाने में है नष्ट्र करने में नहीं इसीलिए मेरा धर्म, मेरी आस्था सब अनंतकाल तक रहेगी। इसको ना कोई ख़तम कर सकता है ना मिटा सकता है। बस यही अंतर है हिन्दु और दुसरे धर्मो में...... तो गर्व से कहो हम राम के वंशज है।speakbindas.blogspot.com

बढ़ेगा रोजगार बढेगा भारत - बस एक कदम ओर...



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बस एक कदम ओर

देश का युवा रोजगार को लेकर हमेशा से ही भ्रमित रहा है।  क्योंकि रोजगार की जब-जब बात आती है तो हमारी सुई  बस एक ही जगह पर आकर अटक जाती है और वो है सरकारी नौकरी या मल्टीनेशनल कंपनी में एक अच्छी खासी नौकरी, सुबह नौ बजे जाओ और पांच बजे घर वापिस आ जाओ। लेकिन स्व: रोजगार का हमसे दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। क्योंकि हम बचपन से यही सुनते और पढ़ते आये है की पढाई करनी है और फिर सरकारी नौकरी करनी है। लेकिन इसी सोच ने हमारे अंदर  कुछ नया करने की इच्छा शक्ति को दबा दिया या यूँ कहे पनपने ही नहीं दिया। जिसका असर अब पूरी तरह दिखाई पड़ रहा है। 

एक तरफ बढ़ती जनसँख्या और घटती नौकरियों ने अर्थव्यस्था का पहिया मानो जाम कर रखा है। दूसरा हमारा अर्थतंत्र भी कमजोर हो रहा है। वंही अगर बात करे दुसरे देशो की  तो वहां पर लोग स्वरोजगार पर ज्यादा निर्भर होना पसंद करते है। क्योंकि  शायद उन देशो को हमसे पहले ये आभास हो चल था कि देश अगर सिर्फ सरकारी तंत्र का मोहताज़ रहा तो कभी विकसित नहीं हो पायेगा।  चीन जैसा देश, जहाँ की आबादी हमसे भी ज्यादा है वो सबसे ज्यादा व्यापार पर ही निर्भर है।  

लेकिन अब समय आ गया है जब हमें इस सोच से निकल कर आगे बढ़ने पर ध्यान देना होगा वरना कुछ ही सालो में देश पिछड़ जायेगा और यंहा के हालत बहुत ख़राब होंगे। अब हमें अपना ध्यान नौकरी  से हटाकर व्यवसाय की तरफ खींचना होगा। जिसके लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। उसके लिए कई तरह की योजनाए भी सरकार ने शुरू की है। 

ऐसा लगता है मोदी सरकार को पहले ही इस बात का इल्म हो चला था की देश जब तक स्व: रोजगार की तरफ अग्रसर नहीं होगा तो हम कभी तरक्की नहीं कर पाएंगे।  इसके लिए मोदी सरकार के पिछले पांच साल में कई सारी योजनाएं शुरू की गई। ऐसी कई सारी योजनाएं  है, जिनको लेकर हमारा युवा बिलकुल भी सजग नहीं है। 

१. मेक इन इंडिया-योजना 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये नारा देश के अंदर जज्बा भरने के लिए दिया। जिसे 25 सितंबर 2014 को लॉन्‍च किया गया।आगे चलकर यह एक इंटरनेशनल मार्केटिंग का अभियान बन गया। मेक इन इंडिया की कोशिश है कि भारत एक आत्मनिर्भर देश बने। जो विश्व पटल पर भारत को विकसित देशों के बराबर लाकर खड़ा कर सके। 

२. मुद्रा बैंक योजना -
प्रधानमंत्री ने इस योजना की शुरुआत 8 अप्रैल 2015 को की.इसके तहत 5.71 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बांटा जा चुका है. इस योजना का लाभ तीन साल के दौरान 12.27 करोड़ लोगों को दिया जा चुका जिसमें 3.49 करोड़ लाभार्थियों ने नए कारोबार के लिए कर्ज लिया है. इसके तहत मुद्रा बैंक छोटे एंटरप्रेन्‍योर्स को 10 लाख रुपये तक का क्रेडिट देतीहै और माइक्रो फाइनेंस इंस्‍ट‍िट्यूसंश के लिए रेगुलेटरी बॉडी की तरह काम करती है. इसमें तीन विकल्‍प हैं- शि‍शु में 50 हजार तक का लोन, किशोर में 50 हजार से 5 लाख तक का लोन और तरुण में 5 लाख से 10 लाख तक का लोन दिया जाता है.

३. प्रधानमंत्री विकास कौशल योजना 
प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी शुरुआत 15 जुलाई 2015 को की थी।  इस अवसर पर नरेंद्र मोदी ने कहा , 'अगर देश के लोगों की क्षमता को समुचित और बदलते समय की आवश्यकता के अनुसार कौशल का प्रशिक्षण देकर निखारा जाता है तो भारत के पास दुनिया को 4 से 5 करोड़ कार्यबल उपलब्ध करवाने की क्षमता होगी"।सरकार इसके तहत देश के इंडस्‍ट्रियल ट्रेनिंग सेंटर्स को बढ़ावा देती है, ताकि युवाओं को निपुण बनाया जा सके। 

४. स्टैंड उप योजना -
इसकी शुरुआत मोदी सरकार ने  5 अप्रैल 2016 को नोएडा के सेक्टर-62 में की गई. इस योजना के तहत  प्रधानमंत्री ने एक वेब पोर्टल की शुरुआत की। इसका उद्देश्‍य नए उद्यमियों को स्थापित करने में मदद करना है।  इससे देशभर में रोजगार बढ़ेगा. योजना के अंतर्गत 10 लाख रुपये से 100 लाख रुपये तक की सीमा में स्टैंड अप इंडिया लोन योजना अनुसूचित जाति, पिछड़े वर्ग, जनजातियों और महिला उद्यमियों के लिए भारत सरकार द्वारा एक नई पहल है।

५. स्टार्ट उप योजना-
स्टार्ट उप इंडिया की घोषणा मोदी सरकार ने १५ अगस्त २०१५ को लाल किले से की थी। जिसकी शुरुअल १६ जनवरी २०१६ को दिल्ली के विज्ञानं भवन से की गई थी।  जिसका उद्देश्य भारत में उध्मीयता और रोजगार को बढ़ावा देना है। और इस योजना के तहत उधमियों को कैसे ऋण आसानी से मिल सके इसकी ये जोजना थी ताकि ज्यादा से ज्यादा स्व:रोजगार का सृजन हो सके। क्योंकि सरकार का मानना है की हमारा युवा बहुत ही होनहार है। जरुरत है उसको दिशा देने की जिसमे  ये योजना उनको अपने उद्देश्य को पूरा करने में सहयोगी बनेगी। 
५.  उड़ान प्रोजेक्‍ट योजना 
जम्मू एवं कश्मीर में 'उड़ान' योजना की शुरुआत विशेष उद्योग पहल के तहत 40,000 युवाओं को पांच साल में प्रमुख उच्च विकास क्षेत्रों में कौशल प्रदान करने और उनमें रोजगार क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है। राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद (एनएसडीसी) और निगमित क्षेत्र द्वारा इस योजना का क्रियान्वयन पीपीपी मोड में किया जा रहा है.

मेरे विचार में ये सही समय है अपने हुनर और काबिलियत के दम पर आगे बढ़ने के लिए, अब हमें ये समझना होगा की सिर्फ नौकरी ही देश की समस्याओ का समाधान नहीं है बल्कि छोटे व्यवसाय भी देश की दिशा और दशा को बदलने का मादा रखते है।  इसीलिए सरकार को  भी चाहिए कि  इन योजनाओ को सही से लागू कराये और नौजवानो तक पहुंचा कर ही इसको सफल बनाया जा सकता है। क्योंकि देश का अधिकांश युवा अभी भी इन योजनाओ से बेखबर है। speakbindas.blogspot.com



एक कदम स्वच्छता की ओर

Here are 10 iconic places govt will clean under Swachh Bharat Abhiyan
मेरा भारत स्वच्छ भारत 


वैसे तो आपने भी देखा होगा की हमारे देश में अमूनन कोई भी अभियान ज्यादा समय तक नहीं चलता। सरकार अपना एक नया स्लोगन जनता के सामने रखती है और हमें भी लगता है की हाँ ये सरकार कुछ नया करेगी। ऐसा ही एक अभियान है स्वच्छता का अभियान। लेकिन अब स्वच्छ भारत का सपना कोई स्लोगन या नारा नहीं रहा बल्कि आज की मेरी आपकी और हम सब की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। 
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भारत की स्वतंत्रता से पहले कहा था कि "स्वच्छता आजादी से अधिक महत्वपूर्ण है" वे भारत के में व्याप्त गन्दी से अच्छी तरह परिचित थे। उन्होंने भारत के लोगों को साफ-सफाई और स्वच्छता के बारे और इससे अपने दैनिक जीवन में शामिल करने के लिये बहुत जोर दिया। हालांकि लोगों की इसमें इतनी रुचि नहीं दिखी। भारत की आजादी के कई वर्षों के बाद, सफाई के प्रभावी अभियान के रूप में इसे आरम्भ किया गया है। मोदी जी का इस अभियान को पूरा करने का लक्ष्य इसी वर्ष का है।
हमारे देश को स्वच्छ बनाने के लिए भारत सरकार ने एक नई योजना निकाली है, जिसका नाम 'स्वच्छ भारत अभियान' रखा गया है। इस अभियान के तहत सभी देशवासियों को इसमें शामिल होने के लिए जोर शोर से  कहा गया है।
यह अभियान आधिकारिक रूप से 1999 से चला रहा है पहले इसका नाम "ग्रामीण स्वच्छता अभियान" था, लेकिन 1 अप्रैल 2012 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस योजना में बदलाव करते हुए इस योजना का नाम "निर्मल भारत" अभियान रख दिया और बाद में सरकार ने इसका पुनर्गठन करते हुए इसका नाम पूर्ण स्वच्छता अभियान कर दिया था। स्वच्छ भारत अभियान के रूप में 24 सितंबर 2014 को केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस को मंजूरी मिल गई।

स्वच्छ भारत अभियान का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने महात्मा गाँधी जी की 145 वीं जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर 2014 को किया। उन्होंने राजपथ पर जनसमूहों को संबोधित करते हुए राष्ट्रवादियों से स्वच्छ भारत अभियान में भाग लेने और इसे सफल बनाने को कहा। साफ-सफाई के संदर्भ में यह सबसे बड़ा अभियान है। क्योंकि गाँधी जी का सपना था कि हमारा देश भी विदेशों की तरह पूर्ण स्वस्थ और निर्मल दिखाई दे। इस बात को मध्य नजर रखते हुए प्रधानमंत्री जी ने उन्हीं के जन्मदिवस पर इस अभियान की शुरुआत दिल्ली के राजघाट से की थी।
देश की सफाई एकमात्र सफाई-कर्मियों की जिम्मेदारी नहीं है, क्या इस में नागरिकों की कोई भूमिका नहीं है, हमें इस मानसिकता को बदलना होगा।। (नरेंद्र मोदी)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए दिल्ली कि वाल्मीकि बस्ती में सड़कों पर झाड़ू लगाई थी। जिससे देश के लोगों में यह जागरुकता आए कि अगर हमारे देश का प्रधानमंत्री देश को स्वच्छ करने के लिए सड़क पर झाड़ू लगा सकता है, तो हमें भी अपने देश को स्वच्छ रखने के लिए अपने आसपास सफाई रखनी होगी।
इस अभियान को और भी प्रभावी बनाने के लिए, मोदी जी ने 9 लोगों को चुना जैसे  मृदुला सिन्‍हा, सचिन तेंदुलकर, बाबा रामदेव, शशि थरूर, अनिल अम्‍बानी, कमल हसन, सलमान खान,प्रियंका चोपड़ा और तारक मेहता का उल्‍टा चश्‍मा की टीम जैसी नौ नामचीन हस्तियों को आमंत्रित किया कि वे भी स्‍वच्‍छ भारत अभियान में अपना सहयोग प्रदान करें। और उनसे निवेदन किया कि वे अपने आगे इस श्रृंखला में और 9 लोगों को जोड़ें और उन्हे स्वच्छता का ज्ञान दें और अपने आस-पास स्वच्छता को बढ़ावा दें। इस प्रकार इस श्रृंखला से प्रत्येक भारतीय को जोड़ने का इरादा था। हम काफी हद तक इस स्वच्छता अभियान में सफल हो चुके हैं। अब तक पूरे भारत में 98% शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है। सिक्किम को पहले पूर्णतः खुले मे शौच मुक्त राज्य का खिताब प्राप्त है। इस योजना को पूरे भारत ने मिल कर पूरा किया है और यह बात फिर सच कर दिखाया कि पूरा भारत अगर एक जुट हो जाए, तो मुश्किल से मुश्किल काम भी पूरा कर सकते हैं।
इस अभियान का सबसे अच्छा हिस्सा यह है कि कोई भी क्षेत्र इसके प्रभाव से अछूत नहीं है और भारतीय फिल्म मनोरंजन उद्योग ने भी इस परियोजना को काफी गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है। वास्तव में इस विषय पर एक सुपरहिट फिल्म "टॉयलेट:एक प्रेम कथा" भी बन चुकी है
 स्वच्छता अभियान केवल सरकार द्वारा पूरा नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए समाज के हर नागरिक को आगे बढ़कर हिस्सा लेना चाहिए और इसके लिए आवश्यकता है देश के नागरिकों में एकता की और व्यक्तिगत तौर पर स्वच्छता को बढ़ाने की। यदि देश का हर व्यक्ति यह सोच ले कि चाहे वह जहां भी जाए उसे गंदगी नहीं फैलानी जैसे सार्वजनिक स्थानों, स्कूल, कॉलेज, पर्यटक स्थल जैसी जगहों कि सुरक्षा वह अपने घर की तरह करें।
मुझे पूरा विश्वाश है कि वह दिन दूर नहीं जब भारत की गिनती स्वच्छ देशों मे होने लगेगी। और कौन सा ऐसा भारतीय यह सम्मान नहीं पाना चाहेगा। देश के जिम्मेदार नागरिक बनें और देश को स्वच्छ बनाएं।


                                                                                                                                             जय हिन्द

प्याज से यारी राजनीति पर भारी

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प्याज़ से यारी राजनीति पर भारी 


यूँ तो प्याज़ हर रसोई में पाया जाता है।  क्योंकि इसके बिना आपकी थाली का जायका ख़राब हो जाता है लेकिन आजकल प्याज़ ने राजनितिक गलियारों का जायका बिगाड़ा हुआ है।  वैसे तो हम बचपन से सुनते आये है। कि प्याज काटने पर रुलाती है लेकिन आजकल ये खरीदने पर भी रुला रही है।  जी हाँ सही समझे! प्याज के दाम एक बार फिर आसमान छू रहे है। आम आदमी को प्याज रुला रहा है।  लेकिन कुछ लोग है जो प्याज के बढ़ते दामों से खुश है जी हाँ वो है विपक्ष! जिनको बैठे बिठाये एक मुद्दा मिल गया। तो जंहा एक तरफ सरकार  के लिए प्याज़ सर दर्द बना हुआ है वंही विपक्ष प्याज़ पर विपक्ष अपनी राजनीती चमकाने पर लगा है क्योंकि इतिहास गवाह है कि इसी प्याज ने भारत में कितनी बार सरकार गिराई और बनाई है। 


केंद्र में जब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी तो 1998 में प्याज़ की कीमतों ने फिर रुलाना शुरू कर दिया। अटल जी ने कहा भी कि जब कांग्रेस सत्ता में नहीं रहती तो प्याज परेशान करने लगता है। शायद उनका इशारा था कि कीमतों का बढ़ना राजनैतिक षड्यंत्र है। उस समय दिल्ली प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और विधानसभा चुनाव सिर पर थे। तब प्याज के असर से बचने के लिए सरकार ने कई तरह की कोशिशें हुई थी। 
 
दिल्ली में भी जब बीजेपी की सरकार थी और मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज के समय में भी सरकार गिरने में प्याज ने अहम् रोल निभाया था। उसके बाद शीला दीक्षित की सरकार को भी इसी प्याज ने गिरया था। भ्रष्टाचार के साथ महंगाई का मुद्दा चुनाव में एक और बदलाव का साक्षी बना।


अब फिर प्याज की कीमतों में उछाल का सीजन है और देश के कई हिस्सों में चुनाव भी आने वाले है तो विपक्ष में बैठी कांग्रेस सरकार इस मुद्दे को आसानी से नहीं छोड़ेगी। क्योनी आने वाले दिनों में हरियाणा और महारष्ट्र में चुनाव होने वाले है इसको देखते हुए अब राजनितिक गलियारों में प्याज का मुद्दा जोर शोर से उठाना लाजिमी होगा। 

जैसे की हम जानते है की महराष्ट्र प्याज का सबसे बड़ा उत्पादनकर्ता है। प्याज़ की एशिया में सबसे बड़ी मंडी लासलगांव यहीं है। पिछले दिनों इस मंडी में थोक प्याज का भाव 50 से 60 रुपये किलो था। महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक में भी प्याज काफी मात्रा में होता है, लेकिन वहां भी इस बार उत्पादन कम रहा। अन्य जगहों पर भी यही हाल है। केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का कहना है कि हर साल अगस्त से लेकर अक्तूबर तक यही होता है। इस साल उत्पादन कम हुआ है। इससे मूल्यों में वृद्धि है।

तो ये देखना दिलचस्प होगा की प्याज और राजनीती की इस जुगल बंदी का हरियाणा और महारष्ट्र के चुनाव पर कोई नकाररत्मक असर पड़ता है या नहीं या मोदी सरकार इस मुद्दे का कोई और तोड़ निकालने में सफल हो जाती है। हम तो यही कहेंगे की "प्याज से यारी राजनीती पर भारी"

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नरेन्द्र मोदी -एक स्तंभ

भारतीय राजनीति ही नही बल्कि विश्व पटल पर भी नरेन्द्र मोदी की ख्याति दिन पर दिन उभर रही हैं  ओर ये भारतीय राजनीति में मील का पत्थर साबित होगा तो, ये कहना ग़लत नही की नरेन्द्र दामोदरदास मोदी भारत का का वह स्तंभ हैं जो कभी हटाया नही जा सकता.
प्रधानमंत्री बनने के बाद भी मोदी की आलोचना में कोई कमी नहीं आई लेकिन कुछ मुद्दे ऐसे भी हैं जिनमें आलोचक भी उनकी तारीफ़ करते हैं जैसे सार्क के द्वारा द्विपक्षीय वार्ता, WTO स्टैंड, बजट एक बड़ी उपलब्धि थी,स्वच्छ भारत अभियान,डिजिटल इंडिया जैसे कुछ मुद्दे हैं जिन पर मोदी का वर्तमान में भी अच्छा काम चल रहा हैं और जिनसे देश में सकारातमक परिवर्तन आ रहा हैं।

भारत के प्रधानमन्त्री बनने के बाद 2 अक्टूबर 2014 को नरेन्द्र मोदी ने देश में साफ-सफाई को बढ़ावा देने के लिए स्वच्छ भारत अभियान का शुभारम्भ किया। उसके बाद पिछले साढे चार वर्षों में मोदी सरकार ने कई ऐसी पहलें की जिनकी जनता के बीच खूब चर्चा रही। स्वच्छता भारत अभियान भी ऐसी ही पहलों में से एक हैं।
प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने 15 सितम्बर २०१८ को 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान आरम्भ किया और जन-मानस को इससे जुड़ने का आग्रह किया। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के 150 जयंती वर्ष के औपचारिक शुरुआत से पहले 15 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम का बड़े पैमाने पर आयोजन किया जा रहा है।

भारतीय सशस्त्र बलों को आधुनिक बनाने एवं उनका विस्तार करने के लिये मोदी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने रक्षा पर खर्च को बढ़ा दिया है। सन २०१५ में रक्षा बजट ११% बढ़ा दिया । सितम्बर २०१५ में उनकी सरकार ने वन रैंक वन पेन्शन की बहुत लम्बे समय से की जा रही माँग को स्वीकार कर लिया।
मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर भारत के नागा विद्रोहियों के साथ शान्ति समझौता किया जिससे १९५० के दशक से चला आ रहा नागा समस्या का समाधान निकल सके।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को अमेरिका के न्यूयॉर्क में स्वच्छ भारत अभियान के लिए बिल गेट्स द्वारा ग्लोबल गोलकीपर्स अवॉर्ड (Global Goalkeeper Award) से नवाजा गया. स्वच्छता के लिए सम्मान मिलने पर प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान लोगों को संबोधित करते हुए यह अवॉर्ड 130 करोड़ भारतीयों को समर्पित किया.
ऐसी ना जाने कितनी उपलब्धियां है, जो मोदी सरकार में हुई है...और ना जाने कितनी और होगी ये तो आने वाला समय ही बताएगा...speakbindas.blogspot.com



नरेन्द्र मोदी एक स्तंभ

भागो भागो शोर है आया- भारत की बेटी अब नहीं जलेगी

भारत की बेटी अब नहीं जलेगी भागो भागो शोर है आया धुएं का उड़ता गुबार लाया क्या किसी ने पटाखा जलाया या पराली का जहर है छाया ...