हम राम के वंशज - हिन्दू भला है तभी तो छला है

Image result for राम
राम इस देश की आत्मा है   

यूँ तो यह देश आर्यो का देश कहलाया जाता है। हम इस देश में कब,कैसे और कहाँ से आए इसके बारे में भी इतिहास कारो के अपने अपने मत और विश्वाश है। लेकिन इसमें किसी को कोई मदभेद नहीं की यह देश हज़ारो सभ्यता देख चुका। हमारे वेदो-पुराणों  में इसके साक्ष्य भी मिलते है। 

लेकिन ये बहुत विचित्र ही है एक तरफ जहां हम राम के नाम पर दशहरा और दिवाली मनाते है वही कुछ लोगो को राम के होने के सबूत चाहिए। बहुत बचकाना है ,ये सब! कि जिसके पूर्वज के बारे में पुराणों में लिखा गया।  जिसके नाम से आपका दिन शुरू और खत्म होता है, जिसको हमारे सविधान में पहले पृष्ट पर अंकित किया गया, वो है भी या नहीं इसका प्रमाण हमारा न्याय तंत्र मांगता है। 

वो भी किस लिए जो बाहर से आकर इस देश पर राज करता है  हमारे धार्मिक स्थलों को तोड़ता है।  वो भी उस स्थल को जो हिन्दुओ का प्रतिक है ताकि हिन्दुओं का अस्तित्व धीरे -धीरे समाप्त हो जाए और लोगो के पास ऐसा कोई साक्ष ना बचे। जिससे ये साबित हो सके की ये कि यह एक  हिन्दू राष्ट्र था। तभी आज अदालत में जब हम अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे है तो बार बार एक ही सवाल उठाया जाता है कि है कोई सबूत की राम यहाँ पैदा हुए।

कौन थे वो लोग जो भारत में आये? क्या था उनका मकसद सिर्फ चोरी या मंदिर तोडना नहीं। यही है असली कहानी।  इनका मकसद सिर्फ चोरी करना नहीं था मंदिर तोडना नहीं था बल्कि हिंदू सभ्तया को नष्ट करना था। इसके लिए बाहर से आये लोगो ने जो केवल आये तो थे लूट करने लेकिन वो यही बस गए बल्कि उनके पास इतनी ताकत भी आ गई की उन्होंने इस देश पर सालो तक राज किया। कैसे? 

यहाँ आपको समझने की जरुरत है।  कि ये जो लोग बाहर से आये इनके साथ इनके बीवी बच्चे नहीं थे मतलब साफ़ है इन्होने यही से दरिंदगी दिखानी सुरु की।  और हमारी माँ बहनो का बलात्कार इन्ही के आने के बाद शुरू हुआ। इन्होने औरतो पर अत्याचार किये और उनसे जो बच्चे पैदा हुए वो आज अपना रंग दिखा रहे है। लेकिन ये बात हमें समझनी पड़ेगी कि इनको पन्हा देने वाले वो लालची हिन्दू ही रहे होंगे जो आज बाबर की पैरवी करते है।

हिन्दु भला है तभी तो छला है -

क्यों है हिन्दू इतना भला! क्या आपने जानने की कोशिश की है? शायद नहीं! तो चलो हम आपको बताते है कि क्यूँ हिन्दू कट्टर नहीं हो सकता है। 

पिछले कुछ सालों में इस देश में इस  शब्द ने हमारे कानो पर राज किया वो है असहिष्णुनता! क्यों ? वो इसीलिए कि ये शब्द हमारे धर्म में है ही नहीं बल्कि ये शब्द जाहिलता की निशानी है और ये शब्द एक ऐसे धर्म को चिन्हित करता है जो शायद मानवता के खिलाफ है या कट्टरता की निशानी है। इसीलिए जानबूछकर इसको हिन्दुओं के खिलाफ हथियार बना कर पेश किया जाता है। क्योंकि सच्चाई यही है कि हिन्दु जैसा सहिष्णु जीव इस धरती पर दूसरा कोई नहीं है। 

सहिष्णुता का अर्थ है किसी पर भी आगे रहकर आक्रमण नहीं करना और सहनशील बनना, लेकिन यह अधुरा अर्थ हो सकता है। सहिष्णुता का गलत अर्थ लेने के कारण ही पृथ्‍वीराज चौहान ने हर बार शुत्र को छोड़ दिया लेकिन शत्रु ने इस सहिष्णुता का लाभ उठाकर पुन: आक्रमण कर सबकुछ तहस नहस कर दिया।

सबसे जरूरी है कि हम अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति सहिष्णु बनें। इसमें कोई शक नहीं कि सहिष्णुता हमारी दिनचर्या का एक मुख्य गुण है। इस गुण को अपनाने से हम सदैव प्रसन्नचित तथा प्रफुल्लित रहते हैं इसलिए हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों को सहिष्णुता के महत्व को बताना चाहिए तथा हमें भी अपने बड़ों से भी ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। लेकिन इसकी यह शर्त है कि कोई यदि हमारी सहिष्णुता का सम्मान करता है तो ही सहिष्णु रहा जाए। 

सहिष्णुता का अर्थ है सहन करना और उदारता का अर्थ है खुले दिमाग और विशाल हृदय वाला। जो स्वभाव से नम्र और सुशील हो और पक्षपात या संकीर्णता का विचार छोड़कर सबके साथ खुले दिल से आत्मीयता का व्यवहार करता हो, उसे 'उदार' कहा जाता है। दूसरों के विचारों, तर्कों, भावनाओं और दुखों को समझना ही उदारता है। अनुदारता पशुवत होती है। अपनी रुचि, मान्यता, इच्छा, विचार, धर्म को दूसरों पर लादना, अपने ही गज से सबको नापना, अपने ही स्वार्थ को साधते रहना ही अनुदारता है।

 दुनिया के दूसरे धर्मों में यह प्रवृत्ति स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। सहिष्णुता और उदारता हिन्दू के खून में है तभी तो पिछले सैकड़ों वर्षों से उनका खून बहाया जाता रहा है। तभी तो हिन्दुओं का धर्मांतरण किया जाता रहा है। हिन्दू धर्म में उदारता और सहिष्णुता का कारण यह है कि इस धर्म में परहित को पुण्य माना गया है।

 न्याय और मानवता (इंसाफ और इंसानियत) को धर्म से भी ऊंचा माना गया है। न्याय और मानवता की रक्षा के लिए सबकुछ दांव पर लगा देने के लिए हिन्दुओं को प्रेरित किया जाता रहा है। यही कारण है कि इस धर्म में प्राचीनकाल से ही कभी कट्टरता नहीं रही और इस उदारता, सह-अस्तित्व और सहिष्णुता की भावना के चलते ही हिन्दुओं ने कभी भी किसी दूसरे धर्म या देश पर किसी भी प्रकार का कोई आक्रमण नहीं किया। इसका परिणाम यह रहा कि आक्रांताओं ने समय-समय पर गुलाम बनाकर हिन्दुओं को धर्म, जाति और पंथों में बांट दिया, उनका कत्लेआम किया गया और उन्हें उनकी ही भूमि से बेदखल कर दिया गया।

यही कारण है की आज हम अपने आराध्य का एक राम मंदिर बनवाने के लिए भी कानूनी लड़ाई लड़ रहे है। हमने यहां भी पूरी मानवता को सन्देश दिया कि हिन्दू जैसा सहिष्णु विश्व में दूसरा कोई धर्म नहीं है।  और शायद यही गीता का भी सार है की लड़ो जरूर, लेकिन मानवता को बचाने के लिए लड़ो जरूर , लेकिन उनके खिलाफ जो उसको नष्ट करने वालों है।  

इसी लिए हम कहते है, गर्व से कहते है कि हाँ मैं एक हिन्दू हूँ मेरी आस्था बचाने में है नष्ट्र करने में नहीं इसीलिए मेरा धर्म, मेरी आस्था सब अनंतकाल तक रहेगी। इसको ना कोई ख़तम कर सकता है ना मिटा सकता है। बस यही अंतर है हिन्दु और दुसरे धर्मो में...... तो गर्व से कहो हम राम के वंशज है।speakbindas.blogspot.com

बढ़ेगा रोजगार बढेगा भारत - बस एक कदम ओर...



Image result for vyapar pics
बस एक कदम ओर

देश का युवा रोजगार को लेकर हमेशा से ही भ्रमित रहा है।  क्योंकि रोजगार की जब-जब बात आती है तो हमारी सुई  बस एक ही जगह पर आकर अटक जाती है और वो है सरकारी नौकरी या मल्टीनेशनल कंपनी में एक अच्छी खासी नौकरी, सुबह नौ बजे जाओ और पांच बजे घर वापिस आ जाओ। लेकिन स्व: रोजगार का हमसे दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। क्योंकि हम बचपन से यही सुनते और पढ़ते आये है की पढाई करनी है और फिर सरकारी नौकरी करनी है। लेकिन इसी सोच ने हमारे अंदर  कुछ नया करने की इच्छा शक्ति को दबा दिया या यूँ कहे पनपने ही नहीं दिया। जिसका असर अब पूरी तरह दिखाई पड़ रहा है। 

एक तरफ बढ़ती जनसँख्या और घटती नौकरियों ने अर्थव्यस्था का पहिया मानो जाम कर रखा है। दूसरा हमारा अर्थतंत्र भी कमजोर हो रहा है। वंही अगर बात करे दुसरे देशो की  तो वहां पर लोग स्वरोजगार पर ज्यादा निर्भर होना पसंद करते है। क्योंकि  शायद उन देशो को हमसे पहले ये आभास हो चल था कि देश अगर सिर्फ सरकारी तंत्र का मोहताज़ रहा तो कभी विकसित नहीं हो पायेगा।  चीन जैसा देश, जहाँ की आबादी हमसे भी ज्यादा है वो सबसे ज्यादा व्यापार पर ही निर्भर है।  

लेकिन अब समय आ गया है जब हमें इस सोच से निकल कर आगे बढ़ने पर ध्यान देना होगा वरना कुछ ही सालो में देश पिछड़ जायेगा और यंहा के हालत बहुत ख़राब होंगे। अब हमें अपना ध्यान नौकरी  से हटाकर व्यवसाय की तरफ खींचना होगा। जिसके लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। उसके लिए कई तरह की योजनाए भी सरकार ने शुरू की है। 

ऐसा लगता है मोदी सरकार को पहले ही इस बात का इल्म हो चला था की देश जब तक स्व: रोजगार की तरफ अग्रसर नहीं होगा तो हम कभी तरक्की नहीं कर पाएंगे।  इसके लिए मोदी सरकार के पिछले पांच साल में कई सारी योजनाएं शुरू की गई। ऐसी कई सारी योजनाएं  है, जिनको लेकर हमारा युवा बिलकुल भी सजग नहीं है। 

१. मेक इन इंडिया-योजना 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये नारा देश के अंदर जज्बा भरने के लिए दिया। जिसे 25 सितंबर 2014 को लॉन्‍च किया गया।आगे चलकर यह एक इंटरनेशनल मार्केटिंग का अभियान बन गया। मेक इन इंडिया की कोशिश है कि भारत एक आत्मनिर्भर देश बने। जो विश्व पटल पर भारत को विकसित देशों के बराबर लाकर खड़ा कर सके। 

२. मुद्रा बैंक योजना -
प्रधानमंत्री ने इस योजना की शुरुआत 8 अप्रैल 2015 को की.इसके तहत 5.71 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बांटा जा चुका है. इस योजना का लाभ तीन साल के दौरान 12.27 करोड़ लोगों को दिया जा चुका जिसमें 3.49 करोड़ लाभार्थियों ने नए कारोबार के लिए कर्ज लिया है. इसके तहत मुद्रा बैंक छोटे एंटरप्रेन्‍योर्स को 10 लाख रुपये तक का क्रेडिट देतीहै और माइक्रो फाइनेंस इंस्‍ट‍िट्यूसंश के लिए रेगुलेटरी बॉडी की तरह काम करती है. इसमें तीन विकल्‍प हैं- शि‍शु में 50 हजार तक का लोन, किशोर में 50 हजार से 5 लाख तक का लोन और तरुण में 5 लाख से 10 लाख तक का लोन दिया जाता है.

३. प्रधानमंत्री विकास कौशल योजना 
प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी शुरुआत 15 जुलाई 2015 को की थी।  इस अवसर पर नरेंद्र मोदी ने कहा , 'अगर देश के लोगों की क्षमता को समुचित और बदलते समय की आवश्यकता के अनुसार कौशल का प्रशिक्षण देकर निखारा जाता है तो भारत के पास दुनिया को 4 से 5 करोड़ कार्यबल उपलब्ध करवाने की क्षमता होगी"।सरकार इसके तहत देश के इंडस्‍ट्रियल ट्रेनिंग सेंटर्स को बढ़ावा देती है, ताकि युवाओं को निपुण बनाया जा सके। 

४. स्टैंड उप योजना -
इसकी शुरुआत मोदी सरकार ने  5 अप्रैल 2016 को नोएडा के सेक्टर-62 में की गई. इस योजना के तहत  प्रधानमंत्री ने एक वेब पोर्टल की शुरुआत की। इसका उद्देश्‍य नए उद्यमियों को स्थापित करने में मदद करना है।  इससे देशभर में रोजगार बढ़ेगा. योजना के अंतर्गत 10 लाख रुपये से 100 लाख रुपये तक की सीमा में स्टैंड अप इंडिया लोन योजना अनुसूचित जाति, पिछड़े वर्ग, जनजातियों और महिला उद्यमियों के लिए भारत सरकार द्वारा एक नई पहल है।

५. स्टार्ट उप योजना-
स्टार्ट उप इंडिया की घोषणा मोदी सरकार ने १५ अगस्त २०१५ को लाल किले से की थी। जिसकी शुरुअल १६ जनवरी २०१६ को दिल्ली के विज्ञानं भवन से की गई थी।  जिसका उद्देश्य भारत में उध्मीयता और रोजगार को बढ़ावा देना है। और इस योजना के तहत उधमियों को कैसे ऋण आसानी से मिल सके इसकी ये जोजना थी ताकि ज्यादा से ज्यादा स्व:रोजगार का सृजन हो सके। क्योंकि सरकार का मानना है की हमारा युवा बहुत ही होनहार है। जरुरत है उसको दिशा देने की जिसमे  ये योजना उनको अपने उद्देश्य को पूरा करने में सहयोगी बनेगी। 
५.  उड़ान प्रोजेक्‍ट योजना 
जम्मू एवं कश्मीर में 'उड़ान' योजना की शुरुआत विशेष उद्योग पहल के तहत 40,000 युवाओं को पांच साल में प्रमुख उच्च विकास क्षेत्रों में कौशल प्रदान करने और उनमें रोजगार क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है। राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद (एनएसडीसी) और निगमित क्षेत्र द्वारा इस योजना का क्रियान्वयन पीपीपी मोड में किया जा रहा है.

मेरे विचार में ये सही समय है अपने हुनर और काबिलियत के दम पर आगे बढ़ने के लिए, अब हमें ये समझना होगा की सिर्फ नौकरी ही देश की समस्याओ का समाधान नहीं है बल्कि छोटे व्यवसाय भी देश की दिशा और दशा को बदलने का मादा रखते है।  इसीलिए सरकार को  भी चाहिए कि  इन योजनाओ को सही से लागू कराये और नौजवानो तक पहुंचा कर ही इसको सफल बनाया जा सकता है। क्योंकि देश का अधिकांश युवा अभी भी इन योजनाओ से बेखबर है। speakbindas.blogspot.com



नरेन्द्र मोदी एक स्तंभ

भागो भागो शोर है आया- भारत की बेटी अब नहीं जलेगी

भारत की बेटी अब नहीं जलेगी भागो भागो शोर है आया धुएं का उड़ता गुबार लाया क्या किसी ने पटाखा जलाया या पराली का जहर है छाया ...