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| प्याज़ से यारी राजनीति पर भारी
यूँ तो प्याज़ हर रसोई में पाया जाता है। क्योंकि इसके बिना आपकी थाली का जायका ख़राब हो जाता है लेकिन आजकल प्याज़ ने राजनितिक गलियारों का जायका बिगाड़ा हुआ है। वैसे तो हम बचपन से सुनते आये है। कि प्याज काटने पर रुलाती है लेकिन आजकल ये खरीदने पर भी रुला रही है। जी हाँ सही समझे! प्याज के दाम एक बार फिर आसमान छू रहे है। आम आदमी को प्याज रुला रहा है। लेकिन कुछ लोग है जो प्याज के बढ़ते दामों से खुश है जी हाँ वो है विपक्ष! जिनको बैठे बिठाये एक मुद्दा मिल गया। तो जंहा एक तरफ सरकार के लिए प्याज़ सर दर्द बना हुआ है वंही विपक्ष प्याज़ पर विपक्ष अपनी राजनीती चमकाने पर लगा है क्योंकि इतिहास गवाह है कि इसी प्याज ने भारत में कितनी बार सरकार गिराई और बनाई है।
केंद्र में जब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी तो 1998 में प्याज़ की कीमतों ने फिर रुलाना शुरू कर दिया। अटल जी ने कहा भी कि जब कांग्रेस सत्ता में नहीं रहती तो प्याज परेशान करने लगता है। शायद उनका इशारा था कि कीमतों का बढ़ना राजनैतिक षड्यंत्र है। उस समय दिल्ली प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और विधानसभा चुनाव सिर पर थे। तब प्याज के असर से बचने के लिए सरकार ने कई तरह की कोशिशें हुई थी।
दिल्ली में भी जब बीजेपी की सरकार थी और मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज के समय में भी सरकार गिरने में प्याज ने अहम् रोल निभाया था। उसके बाद शीला दीक्षित की सरकार को भी इसी प्याज ने गिरया था। भ्रष्टाचार के साथ महंगाई का मुद्दा चुनाव में एक और बदलाव का साक्षी बना।
अब फिर प्याज की कीमतों में उछाल का सीजन है और देश के कई हिस्सों में चुनाव भी आने वाले है तो विपक्ष में बैठी कांग्रेस सरकार इस मुद्दे को आसानी से नहीं छोड़ेगी। क्योनी आने वाले दिनों में हरियाणा और महारष्ट्र में चुनाव होने वाले है इसको देखते हुए अब राजनितिक गलियारों में प्याज का मुद्दा जोर शोर से उठाना लाजिमी होगा।
जैसे की हम जानते है की महराष्ट्र प्याज का सबसे बड़ा उत्पादनकर्ता है। प्याज़ की एशिया में सबसे बड़ी मंडी लासलगांव यहीं है। पिछले दिनों इस मंडी में थोक प्याज का भाव 50 से 60 रुपये किलो था। महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक में भी प्याज काफी मात्रा में होता है, लेकिन वहां भी इस बार उत्पादन कम रहा। अन्य जगहों पर भी यही हाल है। केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का कहना है कि हर साल अगस्त से लेकर अक्तूबर तक यही होता है। इस साल उत्पादन कम हुआ है। इससे मूल्यों में वृद्धि है।
तो ये देखना दिलचस्प होगा की प्याज और राजनीती की इस जुगल बंदी का हरियाणा और महारष्ट्र के चुनाव पर कोई नकाररत्मक असर पड़ता है या नहीं या मोदी सरकार इस मुद्दे का कोई और तोड़ निकालने में सफल हो जाती है। हम तो यही कहेंगे की "प्याज से यारी राजनीती पर भारी"
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प्याज से यारी राजनीति पर भारी
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"प्याज से यारी राजनीती पर भारी"......Bilkul thik kha chaudhary g....lekin yai modi sarkar hai bilkul tod nikala jayga.
ReplyDeleteबिलकुल सहमत हूँ,उम्मीद हैं मोदी सरकार कुछ ना कुछ उपाय निकाल ही लेगी
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